कला- जगत में लगभग बिसरा दी गयी शिल्पकार हिमा कौल पर राजाराम भादू ने पूरी किताब लिखी है जिसमें उनके कलात्मक विकास और वैयक्तिक संघर्ष का संवेदनशील और जीवंत चित्रण किया है। अपराजित: शिल्पकार हिमा कौल शीर्षक यह पुस्तक रजा फैलोशिप के अन्तर्गत लिखी गयी थी। कला- मर्मज्ञ हेमंत शेष ने इस पर बड़ी गहराई से लिखा है। अपराजित शिल्पकार का पुनर्जीवन समीक्षक : हेमंत शेष अपराजित : शिल्पकार हिमा कौल एक नियमित जीवनी से कहीं अधिक है; यह सांस्कृतिक पुनर्स्थापन का एक कार्य है। राजाराम भादू ने ऐतिहासिक उपेक्षा की छाया से एक उग्र, संवेदनशील कलात्मक विरासत को सफलतापूर्वक बाहर निकाला है। कला-इतिहासकारों, आलोचकों और आधुनिक भारतीय दृश्य संस्कृति में रुचि रखने वाले सामान्य पाठकों के लिए, यह पुस्तक एक ऐसी कलाकार का एक प्रभावशाली प्रमाण है, जिसने व्यक्तिगत पीड़ा को स्थायी मूर्त रूप में बदल दिया। भारतीय कला-इतिहास और आलोचनात्मक साहित्य में, कई परिवर्तनकारी आवाज़ें अक्सर दुखद गुमनामी में चली गई हैं, जिन्हें मुख्यधारा के विमर्श से बाहर कर दिया गया। दिवंगत मूर्तिकार हिमा कौल ऐसी ही एक गहन, फिर भी कम प्रलेखित उपस्थिति का ...
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